कांग्रेस में वर्चस्व की लड़ाई चरम पर- डॉ दुर्गेश केसवानी


कांग्रेस में कमलनाथ को अध्यक्ष पद से हटाने को लेकर चल रहा षड्यंत्र है..

भोपाल / मध्य प्रदेश कांग्रेस में हो रही गुटबाजी अब खुलकर सामने आने लगी है। इसका सीधा सा उदाहरण गुरुवार को कमलनाथ के द्वारा आहूत की गई बैठक से दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह और अरुण यादव जैसे नेताओ के नदारद रहने का है । साथ ही साथ मुरैना में दौरे के दौरान दिग्विजय सिंह ने यह दोहराते हुए कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री से मिलने के लिए किसी की इजाजत की जरूरत नहीं है। बीजेपी प्रवक्ता दुर्गेश केसवानी ने इसे  कांग्रेस मैं वर्चस्व की लड़ाई बताया है। केसवानी ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है कांग्रेस में वरिष्ठ नेता आपस में नूरा कुश्ती से परेशान हैं। एक तरफ कमलनाथ के अहंकारी रवैये से तमाम बड़े नेताओं को घर बैठा दिया है । वहीं दूसरी तरफ दिग्विजय सिंह,अरुण यादव,सुरेश पचौरी, अजय सिंह राहुल भैया जैसे कई बड़े नेता लगातार कमलनाथ से दूरी बना रहे हैं। असल में यह दूरी कांग्रेस नेताओं के वर्चस्व को दर्शा रही है । जहां सभी नेता अपने वर्चस्व को लेकर एक दूसरे को नीचा दिखा रहे हैं ।  डॉ केसवानी ने कहा कि कांग्रेस में वर्चस्व की लड़ाई अपने चरम पर है । मुरैना पहुंचे चाचा दिग्विजय ने यह बात फिर से दोहराई है, क्या मुझे सीएम से मिलने के लिए आपकी परमिशन लेनी पड़ेगी,पर शायद कमलनाथ के द्वारा कहा गया शब्द  “its true”राजनीतिक गलियारों में काफी समय तक गुंजयमान होता रहेगा।
 कुछ दिनों पहले मुख्यमंत्री से मुलाकात के लिए समय मांगने वाले दिग्विजय सिंह ने कमलनाथ से कहा था कि क्या मुख्यमंत्री से मिलने के लिए मुझे आपके परमिशन की जरूरत होगी इस पर कमलनाथ ने दिग्विजय सिंह को दो टूक कहते हुए कहा इस के लिए आपको मुझ से अनुमति लेनी होगी । क्योंकि मैं नेता प्रतिपक्ष हूं। बस यही वह दिन था जिसके बाद से कांग्रेस में वर्चस्व की लड़ाई बढ़ती गई है।
बीजेपी प्रवक्ता दुर्गेश केसवानी ने इस पूरे मामले को कांग्रेस में चल रहे इस षड्यंत्र से भी जोड़ा है । डॉ. केसवानी का कहना है कि जब से कमलनाथ 2 पदों पर बने हुए हैं, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष के साथ नेता प्रतिपक्ष का पद शामिल है। इसके बाद से दिग्विजय सिंह और अरुण यादव मिलकर कोई खिचड़ी पकाते हुए षड्यंत्र करे जा रहे हैं । दिग्विजय सिंह अपने बेटे जयवर्धन को युवा रूपी प्रदेश अध्यक्ष बनाना चाहते हैं। जबकि अरुण यादव खुद को या अपने भाई सचिन यादव को प्रदेश अध्यक्ष के रूप में देखना चाहते हैं।  इसी के लिए यह सब मिलकर कमलनाथ को अध्यक्ष पद से हटाने का षड्यंत्र कर रहे हैं।



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