तिरुपति में सात दिन से चलने वाली गंगम्मा जतरा उत्सव बुधवार सुबह माता के विश्व रूप दर्शान से संपन हुआ


सच्चा दोस्त/ तिरूपति/रिपोर्टर/मनोज कुमार सुराणा

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तिरुपति तात्या गुंटा गंगम्मा माता का जतारा उत्सव बुधवार की सुबह गंगाम्मा माता के गाल काट ने की प्रथा करने से समाप्त हो गया तिरुपति शहर में सप्ताह भर चलने वाले जतारा उत्सव के अंतिम दिन बुधवार सुबह भक्तों को देवी के विश्वरूपा के दर्शन कराए। परंपरा के अनुसार कैकला वंश माता-पिता (पेरन टाला वेश)के वेश धारण कर नगर में पूरी रात घूमता रहे और बुधवार की सुबह (गोदुलिक वेला में)मंदिर पहुंच कर मिट्टी से बनी माता के विश्व रूप(उग्र रूप) की प्रतिमा की आरती कर कर प्रथा के अनुसार माता के गाल को काटा जाता है ।इस प्रथा के अनुसार माता के गाल काटते ही उग्र रूप में रहने वाली गंगाम्मा माता शीतला होजती है जिसे जतरा उत्सव के समापान मना जाता है गाल काटते ही माता के मिट्टी से बनी प्रतिम को ध्वस्त कर दिया जाता है और लोग उस प्रतिम की मिट्टी को पाने के लिए उमड़ पड़ते हैं बाद मे उत्सव का समापन हो जाता है



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