तिरंगे झंडे का अपमान एक शोचनीय विषय

कहा भी जाता हैं कि “अति सर्वस्य वर्जयेत “यानी किसी भी बात की अधिकता नुक्सान दायक होता हैं । चिकित्सा शास्त्र में हीनयोग अतियोग और मिथ्यायोग रुग्णता की निशानी होती हैं । जैसे बरसात में अधिक वर्षा होना ,या कम वर्षा होना या बरसात में गर्मी अधिक पड़ना या ठण्ड अधिक पड़ना मिथ्यायोग कहलाता हैं ।
कहा भी जाता हैं यदि कोई शासक अपनी मनमानी कर अपना रौब ज़माना चाहता हैं तो उसका प्रभाव पड़ता हैं पर वह अस्थायी होता हैं । इसी प्रकार अत्याचार भी एक सीमा तक सहनीय होता हैं उसके बाद वह शांत या विस्फोटक होने लगता हैं ।
जिनको हम आदर्श मानते हैं जब उनकी लोकप्रियता चरम पर होने से उन्हें अप्रिय होने का डर सताने लगता हैं । इसी प्रकार वर्तमान शासक या प्रधान नौकर की लोकप्रियता अधिक होने पर उनकी छवि /पोस्टर /फोटो की अधिकता होने पर कूड़ेदान में दिखाई देती हैं ।
आज जिस तिरंगे के पीछे लाखों लोगों ने अपनी जान दी ,सैकड़ों वर्षो तक संघर्ष जारी रखा की यह हमारा गौरव हैं और कभी झंडा झुकने न पाए ,झंडा हमारी आन ,बान, शान का प्रतीक माना जाता रहा और हैं और आगे भी रहेगा पर —-इस शासन ने तिरंगे झंडे की शान को दुर्गति में पहुँचाया । देश के अमृत महोत्सव के दौरान हर घर तिरंगा और चौबीस घंटे तिरंगे का फहराना । वैसे तिरंगे झंडे के फहराने का पात्र वह हैं जो ईमानदार ,शुचिता और देश के विकास में भागीदारी निभाए । हम अपना आत्मावलोकन करे और यह सोचे की क्या हम इस तिरंगे को फहराने के पात्र हैं या नहीं ?सबसे ज्यादा हमारे राजनेता इसके कुपात्र हैं इसके साथ इन झंडों की दुर्गति किस प्रकार हो रही हैं वह अकथनीय और अकल्पनीय हैं ,जिसका साक्ष्य इन चित्रों से परिलक्षित हो रहा हैं ।
तिरंगे झंडों को पुरानी मान्यताओं के अनुसार पंद्रह अगस्त और छबीस जनवरी को ससम्मान फहराना चाहिए और सूर्यास्त के बाद उसे उतार कर रखना चाहिए और हर घर या स्थान पर नहीं फहराना चाहिए । पहले किसी मंत्री के यहाँ के यहाँ जाते थे तो तिरंगा झंडा न फहराने के कारण मंत्री बाहर हैं पर आज चौबीस घंटे लहराने के कारण यह समझ में नहीं आता की मंत्री बंगले पर हैं या नहीं ।
तिरंगे झंडे का फहराना देश भक्ति नहीं हैं वरन तिरंगे में जो आदर्श निहित हैं उनका पालन करना और उसे योग्य ही फहराने के योग्य हैं बाकी सब दिखावा हैं और यह देश ,झंडे का अपमान हैं ।

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