जर्मनी फ्रांस इटली चीन सहित यूरोप के देशों में भारी महंगाई

  • मध्यम वर्गीय सड़कों पर कर रहे हैं प्रदर्शन
  • जनता की नाराजगी से सरकारें घबराई
    लंदन । यूरोप के 19 देशों में महंगाई के कारण जन विद्रोह सड़कों पर आकर विरोध कर रहा है। इन देशों में महंगाई ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। पूर्वी यूरोप के एस्टोनिया में 23 फ़ीसदी महंगाई बढ़ गई है।
    पश्चिमी यूरोप के धनी देश जिनमें जर्मनी फ्रांस नीदरलैंड स्पेन और इटली आते हैं। यहां पर भी महंगाई पर काबू करने पर सरकारें असफल रही हैं। महंगाई को काबू में करने के लिए सस्ते दामों में सामान उपलब्ध कराने के लिए विशेष व्यवस्था भी की गई है। लेकिन इससे स्थिति नियंत्रण पर नहीं आ रही है। मध्यमवर्ग का गुस्सा अब सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करने पर मजबूर हो रहा है।

ब्रिटेन भी अछूता नहीं
ब्रिटेन में भी महंगाई सबसे बड़ा मुद्दा है। प्रधानमंत्री पद के चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा महंगाई और टैक्स बना हुआ है। ब्रिटेन के कई राज्यों में महंगाई के कारण स्थिति विस्फोटक बनी हुई है।
महंगाई और बेरोजगारी का सबसे ज्यादा प्रभावित युवा
यूरोप के देशों में महंगाई और बेरोजगारी के कारण सबसे ज्यादा नाराज युवा वर्ग है। 30 वर्ष तक की आयु के 58 फ़ीसदी युवा बेरोजगारी और महंगाई से त्रस्त हैं। युवा खुलकर सड़कों पर विरोध कर रहे हैं।
पोलैंड में महंगाई की दर पिछले दो दशक के दौरान 18 फ़ीसदी बढ़ गई है। पोलैंड इस समय यूक्रेन के शरणार्थियों की समस्या से जूझ रहा है। महंगाई और बेरोजगारी के कारण स्थानीय लोगों ने अब यूक्रेन के शरणार्थियों के विरोध में आंदोलन शुरू कर दिए हैं।

चीन भी महंगाई की मार से बेहाल
चीन के कई राज्य बिजली की कमी से जूझ रहे हैं। बिजली की कमी के कारण कई उद्योग धंधे बंद पड़े हुए हैं। पानी की भारी कमी बनी हुई है। समुद्र से बंदरगाह तक जाने वाली नदियां सूख गई हैं। जिसके कारण बंदरगाह से सामान नहीं पहुंच पा रहा है। खाने पीने की चीजों के दाम बेतहाशा बढ़ गए हैं। चीन में कठोर लॉक डाउन चल रहा है। अर्थव्यवस्था में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। युवाओं को रोजगार नहीं मिल पा रहा है। महंगाई के कारण चीन के कई राज्यों में जीवन यापन बड़ा मुश्किल हो गया है।

महंगाई की मार विश्वव्यापी
महंगाई बेरोजगारी और अर्थव्यवस्था की मंदी धीरे-धीरे करके दुनिया के सभी देशों में बड़ी तेजी के साथ फैलती जा रही है। यूरोप के देश ऊर्जा संकट महंगाई और बेरोजगारी से बुरी तरह प्रभावित हैं। एशिया के देश भी इससे अछूते नहीं हैं। जिस तरह से महंगाई बेरोजगारी और आर्थिक मंदी सारी दुनिया के देशों में बढ़ रही है। उसके कारण सरकारों में घबराहट बढ़ती जा रही है। सरकारों के खिलाफ प्रदर्शन सड़कों पर आकर हो रहे थे, जो अब कई जगह हिंसक होते जा रहे हैं। किसी भी सरकार को इससे बाहर निकलने का रास्ता नहीं सूझ रहा है।

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