जम्मू-कश्मीर- पुलवामा में आतंकियों ने गैर कश्मीरी बंगाल के मजदूर को मारी गोली, घायल

जम्मू-कश्मीर- पुलवामा में आतंकियों ने गैर कश्मीरी बंगाल के मजदूर को मारी गोली, घायल
श्रीनगर । जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की गैर काश्मीरियों पर हमले की गतिविधियां खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले में एक बार फिर आतंकियों ने प्रवासियों को निशाना बनाया है। जहां नेवा स्थित उगरगिंड गांव में शुक्रवार सुबह आतंकवादियों ने पश्चिम बंगाल के एक प्रवासी मजदूर को गोली मार दी, जिससे वह घायल हो गया। जम्मू-कश्मीर चुनाव आयोग की घोषणा के बाद आतंकियों के जरिए किया गया यह पहला अटैक है। दरअसल दो हफ्ते पहले ही जम्मू-कश्मीर चुनाव आयोग ने गैर-स्थानीय लोगों को मतदान का अधिकार प्रदान करने की घोषणा की थी। इसके तहत जो लोग केंद्र शासित प्रदेश में पांच साल या उससे अधिक समय से रह रहे हैं, वे वोट डालने का हक रखते हैं।
एडीजीपी (कश्मीर जोन) विजय कुमार ने कहा कि घायल मजदूर की पहचान मुनीरुल इस्लाम के रूप में हुई है, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। फिलहाल घायल की हालत स्थिर बताई जा रही है। कश्मीर जोन पुलिस ने हमले के बाद ट्वीट कर लिखा कि, “इलाके की घेराबंदी कर दी गई है। आगे के विवरण का पालन किया जाएगा।” बीती 18 अगस्त को जम्मू-कश्मीर के मुख्य चुनाव अधिकारी हिरदेश कुमार ने जम्मू में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा था कि गैर-स्थानीय – बाहरी लोग जो वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में रह रहे हैं । वे आमतौर पर आगामी विधानसभा चुनावों के लिए खुद को मतदाता के रूप में पंजीकृत कर सकते हैं। वहीं इस घोषणा के बाद कई राजनेताओं ने चुनावी कदम का विरोध करने वाले आतंकवादियों के जरिए यूटी में रहने वाले गैर-स्थानीय लोगों पर अधिक हमलों की आशंका भी जताई थी।
हालांकि, प्रशासन ने बाद में इस बात को लेकर साफ किया था कि कुमार के बयान का गलत मतलब निकाला गया था। चुनावी विकास पीपुल्स रिप्रेजेंटेशन एक्ट, 1951 के नए कानून के आवेदन के आधार पर किया गया था, जिसे 2019 में अनुच्छेद 370 और 35- ए के निरस्त होने के बाद जम्मू-कश्मीर में विस्तारित किया गया था। स्पष्टीकरण में इस बात को साफ किया गया कि केवल वे गैर-अधिवासी जो पांच साल या उससे अधिक समय से केंद्र शासित प्रदेश में रह रहे हैं। ऐसे लोग अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकते हैं, वह भी उस दशा में जब कि वे उन्हें अपने गृह राज्यों में मतदान के अधिकार को त्यागना पड़ेगा। आपकों बता दें कि अगस्त 2019 के बाद से टारगेट किलिंग हमलों में कम से कम 14 कश्मीरी पंडितों और हिंदुओं को आतंकवादियों ने निशाना बनाया। वहीं इस साल मार्च में ही घाटी में आठ टारगेट किलिंग की वारदात सामने आई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.