सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर राहुल गांधी और कांग्रेस का भ्रम जाल -इंजीनियर सत्येंद्र कुमार चौधरी द्वारा तार्किक विश्लेषण

कुछ दिनों से अनुभव किया जा रहा है कि राहुल गांधी और कांग्रेस के नेता एक ही प्रकार के ट्वीट और बयान दिए जा रहे हैं, जो किसी रणनीति का हिस्सा प्रतीत होते हैं और इस रहस्य का उदघाटन कांग्रेस की रिसर्च विभाग की टूलकिट उजागर होने से होता है जिसको कांग्रेस झूठा बतलाती है विरोधियों की चाल बताती है। उसी टूलकिट में सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का विरोध करने का और नरेंद्र मोदी को बदनाम किस प्रकार करना है, विस्तार पूर्वक बतलाया गया है।

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट जो कि दिल्ली में चल रहा है और जिसके अंतर्गत 50 से ज्यादा इमारतों को बनाया जा रहा है जिसमें भारत की संसद, उपराष्ट्रपति भवन,अनेक मंत्रालय , प्रधानमंत्री निवास आदि का निर्माण किया जा रहा है।यहाँ यह बताना भी आवश्यक है कि देश की जनता यह भली भांति जानती है कि उप राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री निवास आदि का स्वामित्व किसी व्यक्ति विशेष का नहीं होता।यदि आगामी लोकसभा चुनाव में, कांग्रेस बहुमत में आती है तो प्रधानमंत्री निवास कांग्रेस का अथवा किसी अन्य बहुमत प्राप्त दल का हो सकता है।इसी प्रकार उप राष्ट्रपति भवन में भी कोई कांग्रेसी विराजमान हो सकता है।अन्य मंत्रालयों जो में भी कांग्रेस नेता मंत्री बन कार्य कर सकते हैं।अथवा कोई और दल के नेता बहुमत प्राप्त कर विराजमान हो सकते हैं ,रह सकते हैं।यह सर्व विदित है।राहुल गांधी और कांग्रेस को इस प्रकार की ओछी, निम्न स्तर की राजनीति नहीं करना चाहिए।मुझे ऐंसा प्रतीत होता है कि कांग्रेस ने अपने नेता गुलाम नबी आजाद की बात कि “राहुल गांधी और कांग्रेस अगले पचास साल तक विपक्ष में बैठेगी” को स्वीकार कर लिया है ।इस प्रकार की राष्ट्रघाती राजनीति कांग्रेस को शोभा नहीं दे रही है।

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के लिए ही सन 2012 में जब कांग्रेस की यूपीए सरकार और कांग्रेस के ही तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष ने भारत सरकार के नगरीय आवास और विकास विभाग के मंत्रालय को पत्र लिखा था। जिसे महुआ (MOHUA) मिनिस्ट्री आफ हाउसिंग एंड अर्बन एडमिनिस्ट्रेशन भी कहते हैं। अब इसी सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का राहुल गांधी और कांग्रेस विरोध करती है जबकि उन्हें इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट का स्वागत करना चाहिए।जो कांग्रेस का लक्ष्य 2012 में था उसी सेंट्रल विस्टा जीर्णोद्धार प्रोजेक्ट को भाजपा की नरेंद्र मोदी की सरकार पूरा कर रही है ।
सेंट्रल विस्टा जीर्णोद्धार प्रोजेक्ट में पचास से ज्यादा इमारतों का निर्माण होना है जिसके फलस्वरूप केंद्र सरकार के अनेक मंत्रालय और विभागीय कार्यालय अपनी स्वयं की इमारत में प्रारंभ हो सकेंगे।वर्तमान में यह कार्यालय किराए की इमारतों में स्वतंत्रता के सत्तर सालों से संचालित हो रहे हैं जिसमें केंद्र सरकार द्वारा किराए के रूप में प्रतिवर्ष एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि व्यय हो रही है।यह रुक जाएगी।इससे प्रतिवर्ष व्यय होने वाली बड़ी धनराशि की बचत होगी,वह अन्य महत्वपूर्ण योजना के क्रियान्वयन में उपयोगी सिद्ध होगी।किराए के कार्यालयों का निर्माण यदि आजादी के शुरुआती बीस पच्चीस वर्षों में ही हो जाता तो अभी तक पिछले पचास सालों का किराया नहीं देना पड़ता और यह धनराशि किसी जनहितकारी प्रोजेक्ट में उपयोग हो रही होती ।जो भारत के उत्थान में सहायक होती।परन्तु कांग्रेस की केंद्र सरकारों ने इस कार्य को नहीं होने दिया ।यह विचारणीय प्रश्न है।

एक तरफ राहुल गांधी और कांग्रेस सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का विरोध कर,कहते हैं कि “कोविड के समय राजा अपना महल बना रहा है जनता परेशान है”वहीं दूसरी ओर जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकारें हैं ,कांग्रेस गठबंधन की सरकारें हैं जैसे छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, झारखंड, राजस्थान पंजाब आदि उन्हें यह दिव्यज्ञान नहीं देते हैं ।छत्तीसगढ़ में नए विधानसभा भवन को बनाया जा रहा है जिसकी वर्तमान में आवश्यकता नहीं है।ढाई सौ करोड़ की अनुमानित लागत से निर्माण कार्य चल रहा है तो राहुल गांधी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को नहीं रोकते हैं।
इसी प्रकार से महाराष्ट्र में कांग्रेस की सांझी सरकार है इसमें शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस सहयोगी हैं वहां पर लगभग नौ सौ करोड़ की लागत से अल्ट्रा मॉडर्न फैसिलिटी वाला,अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित एमएलए हॉस्टल निर्मित किया जा रहा है ।जिसको पहले केंद्रीय मंत्रालय के द्वारा मात्र चार सौ करोड़ रुपए में बनाया जा रहा था अब वही प्रोजेक्ट महाराष्ट्र की कांग्रेस सरकार दोगुनी से भी ज़्यादा राशि में बनवा रही है ।जिसमें भ्रष्टाचार की दुर्गंध आ रही है। मुंबई में सरकार बीएमसी में लगभग तीन हज़ार करोड़ की लागत से कारपोरेटर्स के लिए बंगले बनवा रही है।यहां राहुल गांधी और कांग्रेस अपनी आंखें मूंद लेते हैं।

कोरोना काल में जब सारी दुनिया इसका दंश झेल रही है वैश्विक महामारी से पीड़ित है ।ऐसें समय भी राहुल गांधी और कांग्रेस के अर्थहीन बयान सामने आ रहे हैं। जिससे किसी का भी भला नहीं हो सकता है ।सिर्फ और सिर्फ झूठ का मायाजाल फैलाने की कोशिश की जा रही है।मेरा तो यह मानना है कि इस कोरोना काल में भी अगर हम एप्रोप्रियेट कोविड बिहेवियर या आदर्श कोविड प्रोटोकॉल को अनुशरण करते हुए,आर्थिक गतिविधियों को संचालित करते हैं ,तो इससे लाखों लोगों को भी काम मिलेगा ।एक ओर राहुल गांधी बयान देते हैं कि कोरोना काल में लोगों को काम नहीं मिल रहा है ,बेरोजगारी बढ़ रही है दूसरी ओर केंद्र की मोदी सरकार के प्रोजेक्ट्स का विरोध करते हैं।यह तो लोक मूढ़ता है ।देश की जनता भली भांति जानती है।चाहे मोदी सरकार हो अथवा राज्य की सरकारे हों ,जो प्रोजेक्ट्स प्रगतिशील हैं ।यह तो अच्छा संकेत हैं कि लोगों को रोजगार मिल रहा है। राज्य की अर्थव्यवस्था के साथ साथ देश की अर्थव्यवस्था का भी पहिया धीमे ही सही, किन्तु सही दिशा में आगे दौड़ रहा है।इस प्रकार के कार्यों में तो मुझे ऐसा लगता है कि किसी को आपत्ति नहीं होना चाहिए । निर्माण प्रोजेक्ट के साथ-साथ कोरोना का आदर्श प्रोटोकॉल को भी पालन किया जा रहा है,तो बहुत ही उत्तम है ।मेरा अभिमत है कि सभी राज्य सरकारों में और सारे देश में इस प्रकार के प्रोजेक्ट्स नहीं रुकना चाहिए। लेकिन विपक्षी दल अगर सत्ता पक्ष की या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इन कामों का विरोध करते हैं तो ऐसा लगता है कि सिर्फ और सिर्फ कोरी राजनीति करते हैं। जनता के बीच में भ्रम फैलाना चाहते हैं यह किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है क्योंकि हम सभी भारतवासी हैं ।
मेरा अभिमत है कि सेंट्रल विस्टा के बारे में कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ,समस्त नेताओं ने जिस प्रकार की आपत्ति उठाई है वह अत्यंत निम्न स्तर की है। निंदनीय है।कांग्रेस की धूर्तता, निर्लज्जता उजागर करने वाली है।कांग्रेस और राहुल गांधी को देश की जनता से माफी मांग कर इस विषय का पटाक्षेप करना चाहिए।
(लेखक इंजी सत्येंद्र कुमार चौधरी भाजपा नेता और पूर्व राष्ट्रीय सदस्य संवाद सेल रहे हैं)

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