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वेंकटराघवन: भारतीय कप्तान, जो देश का नंबर-1 अंपायर भी बना, हासिल की वो उपलब्धि, जो सचिन-गावस्कर भी ना कर सके


नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान श्रीनिवास वेंकटराघवन (S Venkataraghavan) आज अपना 77वां बर्थडे सेलिब्रेट कर रहे हैं. उनका जन्म 21 अप्रैल 1945 को मद्रास (अब चेन्नई) में हुआ था. एक समय वेंकटराघवन का शुमार दुनिया के सबसे बेहतरीन स्पिनर्स में किया जाता था. उन्होंने अपनी ऑफ स्पिन गेंदबाजी के जरिए विपक्षी टीम के बल्लेबाजों की नींद उड़ाई. उनकी गेंदें खेलने से अक्सर बल्लेबाज कतराते थे. वेंकटराघवन उस स्पिन चौकड़ी का हिस्सा रहे जिसमें बिशन सिंह बेदी, भागवत चंद्रशेखर और इरापल्ली प्रसन्ना शामिल थे. क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद वह कई साल तक आईसीसी के एलीट पैनल के अंपायर रहे.

एस वेंकटराघवन ने क्रिकेट में जो कुछ हासिल किया उसे महान सुनील गावस्कर और सचिन तेंदुलकर भी नहीं कर पाए. वह संभवत: देश के पहले क्रिकेट हैं जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने के अलावा अंपायर और मैच रेफरी की भूमिका निभाई. वेंकटराघवन का शुमार भारत के सबसे बेहतरीन ऑफ स्पिनर्स में किया जाता है. वह अपनी सटीक और तेज स्पिन गेंदबाजी के लिए मशहूर रहे.

देश के नंबर-1 अंपायर
एस वेंकटराघवन भले ही आज क्रिकेट में सक्रिय न हो लेकिन देश के नंबर-1 अंपायर का खिताब उन्हीं के पास है. उन्होंने साल 1993 से लेकर 2004 तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बखूबी अंपायर की भूमिका निभाई. इस दौरान वह 73 टेस्ट मैचों में अंपायर रहे. भारत के किसी भी अंपायर ने आज तक इतने टेस्ट मैचों में अंपायरिंग नहीं की है. वह दुनिया के 11वें अंपायर हैं जिन्होंने सबसे ज्यादा टेस्ट मैचों में अंपायरिंग की. 52 वनडे मैचों को अगर जोड़ दिया जाए तो वेंकटराघवन कुल मिलाकर 125 इंटरनेशनल मैचों में अंपायर रहे.

मैच रेफरी की भूमिका में वेंकटराघवन
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अंपायर बनने से पहले वेंकटराघवन मैच रेफरी थे. वह 1992 से लेकर 1993 तक मैच रेफरी रहे. इस दौरान वेंकटराघवन ने 13 अंतरराष्ट्रीय मैचों में मैच रेफरी की भूमिका निभाई. मंसूर अली खान पटौदी (टाइगर पटौदी) के बाद वह भारत के दूसरे मैच रेफरी थे. भारत में अब तक गिने-चुने सात मैच रेफरी हुए हैं.

कप्तान के रूप में वेंकटराघवन
टेस्ट कप्तान के रूप में वेंकटराघवन बहुत सफल नहीं हुए. उन्होंने 1974 से लेकर 1979 के दरम्यान 5 टेस्ट मैचों में भारत की कप्तानी की जिनमें 3 मुकाबले हारे और 2 ड्रॉ रहे. वह भारत के 17वें टेस्ट कप्तान थे. इसके अलावा वह 7 वनडे मैचों में भारत के कप्तान रहे जिनमें एक जीते और 6 मैच हारे. वेंकटराघवन भारत के दूसरे एकदिवसीय कप्तान थे.

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वेंकटराघवन का क्रिकेट करियर
वेंकटराघवन ने 57 टेस्ट मैचों में टीम इंडिया का प्रतिनिधित्व किया. इस दौरान उन्होंने 156 विकेट लिए. क्रिकेट के सबसे बड़े प्रारूप में 72 रन देकर 8 विकेट आउट करना उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है. टेस्ट क्रिकेट में उऩ्होंने 5 बार तीन विकेट और 7 बार 4 विकेट लिए. इसके अलावा उन्होंने भारत के लिए 15 वनडे मैच भी खेले जिनमें 5 विकेट लिए. एकदिवसीय क्रिकेट में 34 रन पर 2 विकेट आउट करना उनका बेस्ट प्रदर्शन है.



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