किसान पुत्र

मां की अभिलाषा



मां की अभिलाषा
एक मां हूँ मैं
गर्व है हर्ष है
कि सृष्टि की जन्मदात्री
सम्पूर्ण हूं मैं ।

सत्य है कि
पाती हूं मान सम्मान
पावन  पवित्र तुलसी सा
बिन मेरे घर आंगन है सूना सा,,
पर कभी कभी मैं ,
पलाश बन ना चाहती हूं
किसी मौसम का अभिमान
खिली खिली उज्जवल तपन ,
पूरे रंग को अधिकतम पर लाकर
मस्ती में खिलखिलाना
चाहती हूँ।।।

मैं एक मां  हूँ,
हां सत्य है कि
घर भर में सुवासित
अगर धूप चंदन सी हूं मैं
पूजा आरती की गूंज हूं मैं ,,
पर कभी कभी ,
हां कभी कभी
जूही चंपा गुलाब होना चाहती हूँ,
खुशबू से सराबोर हो
किसी नारी के गजरे में
गूंथ कर सुंदर भी
दिखना चाहती हूं ।।

मैं एक मां  हूँ,
सत्य है कि  मैं,
शीतल रूप हूं चांदनी की
और कभी तपती धूप हूं सूरज की
पर कभी कभी
यूंही बादलों की तरह
इधर उधर बेमतलब सी
उड़ना भी चाहती हूं मैं ।।

हां मैं मां हूं
संपूर्ण हूं गर्वित हूं हर्षित हूं
पर भीतर कहीं
नारी का अल्हड़पन
बरकरार भी रखना चाहती हूं ।।।।

नीना जैन लाइफ कोच दूरदर्शन एंकर  



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