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संजय उवाच: प्लेऑफ का गणित और उलझा, पंजाब ने बैंगलोर और केकेआर ने हैदराबाद को फंसाया


पिछले सप्ताह ब्लॉग लिखते समय उम्मीद यही थी कि यह सप्ताह समाप्त होते होते आईपीएल प्लेऑफ्स में पहुंचने की फेहरिस्त हम सबके सामने होगी. लेकिन क्रिकेट की अनिश्चितता और निर्णायक दौर में लीग के बढ़ते दबाव को देखिए, पिछले सप्ताह हालात जहां थे, फिलहाल तकरीबन वहीं हैं. गुजरात टाइटंस के अलावा अब तक आधिकारिक तौर पर किसी ने भी प्लेऑफ में जगह नहीं बनाई है. टॉप-4 में चल रही बाकी तीन टीमें इस सप्ताह अपने अपने मैच हारी हैं. सच कहा जाए तो प्लेऑफ की लड़ाई अब नंबर तीन और चार के लिए फंसती दिखाई दे रही है.

मंगलवार को टेबल के टॉप पर काबिज लखनऊ सुपरजाएंट्स को गुजरात टाइटन्स के हाथों 62 रन के बड़े फासले से शिकस्त खानी पड़ी, और उसके क्वालिफ़ाई करने का इंतज़ार थोड़ा और लंबा खिच गया. इस पराजय से न सिर्फ गुजरात ने अपनी खोई हुई टॉप सीट दोबारा हासिल कर ली, बल्कि औपचारिक तौर पर क्वालिफ़ाई भी कर लिया. दबाव का आलम कुछ ऐसा कि लखनऊ की टीम जीत के लिए 144 रन के लक्ष्य से भी कोसों दूर रह गई. शुभमन गिल का अर्धशतक और उसके बाद करामाती राशिद खान के सिर्फ 24 रन पर 4 विकेट ने लखनऊ की जड़ों को हिलाकर रख दिया.

अगले दिन यानी बुधवार को प्लेऑफ सीट कन्फर्म करने की दहलीज पर खड़ी राजस्थान रॉयल्स को दिल्ली कैपिटल्स ने आठ विकेट के बड़े फासले से हराया और अंतिम चार मे पहुंचने के खुद के दावे को मजबूत कर लिया. उस मैच मे रविचंद्रन आश्विन ने आईपीएल करियर का पहला अर्धशतक लगाया और देवदत पडिकल अर्धशतक की दहलीज पर पहुंचे. लेकिन दिल्ली के लिए दो विदेशी खिलाड़ियों मिचेल मार्श और डेविड वार्नर ने काम हल्का कर दिया. मार्श ने 89 रन की आतिशी पारी खेली और वॉर्नर ने अर्धशतक पूरा किया. दोनों ने दूसरे विकेट के लिए 143 रन की साझेदारी की.

शुक्रवार को प्लेऑफ की दहलीज पर खड़ी रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर को जीत की तलाश थी, लेकिन पंजाब ने उसकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया, और अब उसकी नैया डगमगाने लगी है. यहां भी दो विदेशी खिलाड़ियों का जलवा था, बेयरस्टो और लिविंगस्टोन ने आरसीबी के गेंदबाजी हमले को तहस नहस कर दिया, हालाकि हर्षल पटेल ने चार विकेट निकाले लेकिन काम न आए. बेयरस्टो ने सिर्फ 29 गेंदों पर 66 की पारी खेली और लिविंगस्टोन ने 70 रन बनाए. जवाब मे रॉयल्स सिर्फ 155 रन बना सके, कगीसो रबाडा ने सिर्फ 21 रन देकर 3 विकेट लिए.

कल यानी शनिवार को सनराइजर्स हैदराबाद को नाइट राइडर्स के हाथों पराजय मिली, और साथ ही प्लेऑफ से तकरीबन रुखसती भी. वैसे भी हैदराबाद के लिए क्वालीफिकेशन एवरेस्ट पर चढ़ने के बराबर था. कोलकाता ने उन्हें हराया जरूर, लेकिन खुद के लिए भी बहुत उम्मीद नहीं जगा सके. कुल मिलाकर पिछला सप्ताह प्लेऑफ के सबसे मजबूत दावेदारों के लिए फंसने का था. यहां न सिर्फ क्वालिफ़ाई करना बल्कि टॉप पर क्वालिफ़ाई करना भी अहम है, क्योंकि यह फाइनल तक पहुँचने का शॉर्टकट है.

आईपीएल लीग का शायद मज़ा भी यही है. कुल मिलाकर आज के डबल हेडर समेत लीग मे सिर्फ 9 मैच बचे हैं, इसके बाद प्लेऑफ़ शुरू हो जाएंगे. दिलचस्प यह कि इन बचे हुए 9 मैचों मे से इस सप्ताह चार मे से तीन क्वालिफायर मिलने वाले हैं. इनमे लखनऊ सुपर जाएंट्स का पहुंचना तकरीबन तय है. उसके अब तक 12 मैचों से 16 पॉइंट्स हैं, और इन दोनों मैचों मे शिकस्त के बावजूद प्लेऑफ की उसकी संभावनाएं शायद पूरी तरह खत्म नहीं होंगी. लेकिन अगर एक भी जीता तो औपचारिक तौर पर अंतिम चार मे होंगे. लखनऊ की नजर इस समय टॉप पर भी होगी, क्योंकि इस जगह के लिए गुजरात को सिर्फ वही चुनौती देने की स्थिति मे दिखाई देता है.

आज खेले जाने डबल हेडर की अपनी अहमियत है. लखनऊ को आज राजस्थान रॉयल्स के साथ खेलना है, अगर जीते तो कवालीफाई हो जाएंगे, अगर रॉयल्स जीते तो 13 मैचों मे 16 पॉइंट्स के साथ उनकी भी जगह अंतिम चार मे जगह तय हो जाएगी. इससे पहले चेन्नई सुपर जाएंट्स का मुकाबला गुजरात टाइटन्स के साथ होगा. दोनों की किस्मत तय हो चुकी है, इसलिए इस मैच की अहमियत सिर्फ यही है, कि इसे जीतकर गुजरात टॉप स्लॉट के नजदीक पहुँच जाएगा.

दिल्ली कैपिटल्स के हाथों शिकस्त ने राजस्थान रॉयल्स की पार्टी थोड़ी खराब की है, उसे अभी दो मैच खेलने है, दोनों जीते तो आसानी से अन्यथा एक जीतने पर अगर-मगर के साथ क्वालिफिकेशन की बेहतर संभावनाए हैं. पंजाब किंग्स के हाथों मिली पिछली शिकस्त ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर को निश्चित तौर पर परेशान कर दिया है. पहले खिताब की उम्मीदें समेटे विराट कोहली के आउट ऑफ फॉर्म चलने के बीच रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू को अपना आखिरी मैच टेबल टॉपर गुजरात जाएंट्स के खिलाफ खेलना है, जो कतई आसान नहीं होने वाला. ऐसे मे इस बात की भी संभावनाए है, की पिछले हफ्ते तक उसकी निश्चित लगने वाली सीट पर दिल्ली कैपिटल्स विराजमान हो जाए. दिल्ली को बाकी दो मैच पंजाब किंग्स और मुंबई इंडियंस के खिलाफ खेलने हैं, जो शायद उतने मुश्किल नहीं होंगे जितना आरसीबी और गुजरात. फिर दिल्ली का नेट रनरेट भी बेंगलुरु की तुलना मे बेहतर है, और रॉयल्स को हराने के बाद उनके हौसले भी बुलंद हैं. ऐसा लगता है, कि दिल्ली कैपिटल्स टॉप फोर से बाहर की इकलौती टीम होगी, जो प्लेऑफस मे पहुँच सकती है.

जैसा की हमने पहले भी चर्चा की कि नंबर तीन और नंबर चार यह दोनों स्लॉट अब भी ओपन दिखाई दे रहे हैं, और दिल्ली की संभावित एंट्री राजस्थान रॉयल्स और बेंगलोर के लिए खतरे की घंटी है. कोलकाता नाइट राइडर्स भले ही पिछला मैच जीतकर पंजाब किंग्स से पॉइंट्स टेबल मे ऊपर हो, लेकिन सही मायने मे अंतिम चार की उसकी उम्मीदें खत्म हो चुकी हैं. पंजाब किंग्स ने अब तक 12 मैचों मे 12 पॉइंट्स हासिल किए हैं, और उसे बाकी दो मैच दिल्ली और हैदराबाद के खिलाफ खेलने हैं. यानी सही अर्थों मे कल दिल्ली और पंजाब के बीच खेला जाने वाला मुकाबला दोनों मे से किसी एक की किस्मत का ताला खोल सकता है. कुल मिलाकर दिल्ली के अलावा पंजाब ही एकमात्र टीम है जिसमे अब भी प्लेऑफ मे पहुंचने का माद्दा है.

प्लेऑफ के इस दिलचस्प समीकरण के बीच एक टीम के तौर पर चेन्नई सुपर जाएंट्स की चर्चा बनती है. डैडस आर्मी के नाम से मशहूर, आईपीएल की सबसे लोकप्रिय इस टीम का विवादों से भी चोली दामन का साथ रहा है. आईपीएल की बाकी टीमों मे भी थोड़े बहुत असंतोष का पूट दिखाई देता है, जैसा कि अभी हाल ही मे कोलकाता नाइट राइडर्स के कप्तान श्रेयस अय्यर ने टीम सलेक्शन मे दखलंदाज़ी का जिक्र किया था. हालाकि उस चर्चा को ढाक मूँद कर विराम दे दिया गया. लेकिन चेन्नई और विवाद लगातार साथ बने हुए हैं. 2018 के सीजन मे टीम सस्पेंशन से लौटने के बाद प्रदर्शन मे भारी उतार चढ़ाव दिखाई दिया है. 18,19,और 21 मे यह टीम रनर्स अप रही, लेकिन 20 मे सातवे नंबर पर और 22 मे नौवें नंबर पर इसने लीग खत्म की है. सुरेश रैना के प्रकरण पर अभी धूल पड़ी भी न थी, कि रवींद्र जडेजा का नया मामला आ गया. धोनी ने लीग शुरू होने से सिर्फ दो दिन पहले कप्तानी छोड़ी, जडेजा कप्तान बने, पहले आठ मैचों मे टीम की हालत पतली हो गई, जडेजा ने कथित तौर पर खुद कप्तानी छोड़ी और धोनी ने फिर कमान संभाल ली. यहाँ तक तो सब ठीक था! लेकिन फिर जडेजा घायल हो गए, बाकी मैचों से बाहर हो गए. टीम ने उन्हे सोशल साइट्स पर और जडेजा ने टीम को अनफॉलो कर दिया. ठीक ऐसा ही सुरेश रैना के साथ भी हुआ था. आखिर चेन्नई की टीम मे ऐसा होता क्यों है? इसी सवाल के साथ इस ब्लॉग मे आपको छोड़े जाता हूं, मुझे लगता है की सीजन खत्म होने के बाद इस मामले पर जमी धुंध खुद ब खुद छट जाएगी.

(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)

ब्लॉगर के बारे में

संजय बैनर्जीब्रॉडकास्ट जर्नलिस्ट व कॉमेंटेटर

ब्रॉडकास्ट जर्नलिस्ट व कॉमेंटेटर. 40 साल से इंटरनेशनल मैचों की कॉमेंट्री कर रहे हैं.

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